
जबलपुर उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोगों की मौत और बीमारी का मामला अब न्यायिक रूप ले चुका है. इस गंभीर घटना को लेकर लगातार हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की जा रही हैं. आज इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई, वहीं एक नई जनहित याचिका पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इस मामले में कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है.
इस मामले में 31 दिसंबर को हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं. पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी की ओर से दायर की गई थी, जबकि दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दायर की गई थी. जिसमें अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की। 31 दिसंबर को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम को अंतरिम आदेश जारी कर सभी प्रभावित लोगों का मुफ्त इलाज करने और इलाके में साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था.
6 जनवरी को होगी सुनवाई
कोर्ट के आदेश के पालन में नगर निगम की ओर से 2 जनवरी को स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी. इस मामले में तीसरी जनहित याचिका भी हाई कोर्ट में दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किया है. तीनों जनहित याचिकाओं पर सुनवाई 6 जनवरी को तय की गई है.
मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग
मामले में वकील मनीष यादव की ओर से कोर्ट के सामने मांग रखी गई कि मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाई जाए. उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ चार मौतों का जिक्र किया गया है, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हैं. ऐसे में विस्तृत और तथ्यात्मक स्थिति रिपोर्ट पेश करने की भी मांग की गई है. फिलहाल इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट की पैनी नजर है और आने वाले दिनों में इस पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं. कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त दिलीप यादव को कोर्ट में उपस्थित होने का नोटिस दिया गया है।
जिम्मेदार अधिकारियों को सजा देने की मांग
इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी ने कहा, ”भागीरथपुरा मामले को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और नगर निगम ने अपना जवाब पेश किया और राज्य सरकार ने कुछ समय पहले स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की थी. इसलिए कोर्ट ने उस स्टेटस रिपोर्ट की सुनवाई के लिए 6 जनवरी की तारीख तय की है, जिसमें बताया गया है कि कितने लोगों की मौत हुई है, कितने लोग आईसीयू में गंभीर हालत में हैं और कितने लोग अस्पताल में भर्ती हैं. हमारी मुख्य मांग है कि इंदौर शहर के हर नागरिक को साफ पानी मिले. और कम से कम अधिकारियों को सजा दी जाए ताकि इंदौर में ऐसी गंभीर घटना दोबारा न हो. तीनों याचिकाओं पर 6 जनवरी को एक साथ सुनवाई होगी.
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