
ममता ने रामसागर पुल का शिलान्यास किया.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सागर द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले ‘गंगासागर पुल’ की आधारशिला रखी। यह पुल मुरीगंगा नदी पर बनेगा और इससे लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी. 4.75 किमी लंबे इस पुल की लागत 1670 करोड़ रुपये है और इसे 2-3 साल में पूरा करने का दावा किया गया है। सागर द्वीप दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है, जहाँ हर साल माघ महीने में गंगासागर मेले के दौरान लाखों लोग गंगा स्नान करने आते हैं। खासकर 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर देशभर से श्रद्धालु कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते हैं।
गंगासागर पुल क्यों महत्वपूर्ण है?
आपको बता दें कि अभी तक लोगों को सागर द्वीप तक पहुंचने के लिए नाव या नौका का सहारा लेना पड़ता है, जो अक्सर खराब मौसम या भीड़ के कारण बाधित हो जाती है। नौका सेवा में औसतन 45 मिनट से 1.5 घंटे का समय लगता है और बारिश या तूफ़ान के दौरान कई घंटों तक रुकती है। इसी वजह से इस पुल की मांग काफी समय से की जा रही थी. गंगासागर सेतु की खास बातें इसे एक महत्वपूर्ण परियोजना बनाती हैं। यह पुल करीब 4.75 किलोमीटर लंबा होगा और चार लेन का होगा. यह काकद्वीप को सागर द्वीप से सीधे जोड़ेगा, जिससे हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित द्वीप को हर मौसम में सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी। पुल के निर्माण से यात्रा का समय घटकर मात्र 10-15 मिनट रह जाएगा, यानी औसतन 30 मिनट से एक घंटे तक की बचत होगी। इससे न केवल गंगासागर मेले की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि सागर द्वीप पर शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक गतिविधियाँ भी आसान और तेज़ हो जाएंगी।
एक करोड़ हिंदुओं को सुविधा
शिलान्यास समारोह के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि यह पुल एक करोड़ से अधिक हिंदुओं को सुविधा प्रदान करेगा. उन्होंने दावा किया कि अगले दो-तीन साल में यह पुल बनकर तैयार हो जायेगा. हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. ममता ने कहा, “हालांकि केंद्र सरकार को इस योजना में मदद करनी चाहिए थी, लेकिन वह केंद्र सरकार से भीख नहीं मांगेंगी. बंगाल सरकार खुद पूरा पैसा देकर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी.” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी सिर्फ झूठ बोलती है और लोगों को आपस में लड़वाती है, लेकिन बंगाल में ये सब नहीं चलेगा.
हिंदू वोट बटोरने की कोशिश
इस पुल के जरिए ममता बनर्जी बंगाल की राजनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं. एक ओर जहां इस परियोजना से हिंदू श्रद्धालुओं की बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा, जो राज्य में चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण है. वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर वह खुद को बंगाल के हितों के रक्षक के तौर पर पेश कर रही हैं, जो बीजेपी के खिलाफ उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. इसके साथ ही वह राज्य सरकार की स्वतंत्रता और विकास पर जोर देकर विपक्षी दलों को जवाब दे रही हैं, खासकर तब जब वित्तीय सहायता को लेकर केंद्र और राज्य के बीच विवाद चल रहा हो.
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