
गोवा क्लब में लगी आग की जांच करते अधिकारी
उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब में आग लगने की घटना को लेकर चार सदस्यीय मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट सामने आई है। जांच में स्थानीय पंचायत, गोवा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गोवा तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, क्लब को चलाने की “प्राथमिक जिम्मेदारी” स्थानीय पंचायत पर रखी गई थी। ट्रेड लाइसेंस मार्च 2024 में समाप्त हो गया था, फिर भी पंचायत ने न तो परिसर को सील किया और न ही संचालन बंद किया। पंचायत ने तोड़फोड़ का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन रोक लगने से पहले मिले समय में कार्रवाई नहीं की।
जांच से पता चला कि जिस संपत्ति पर क्लब चल रहा था वह 1996 से अस्तित्व में थी, जहां पहले दो रेस्तरां संचालित होते थे। जांच में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थित विफलता का खुलासा हुआ है। न्यायिक आयोग की जांच में यह भी पता चला कि निर्माण पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र/नमक क्षेत्र में किया गया था। इस दौरान बिना अधिभोग प्रमाण पत्र के निर्माण कराया गया।
शिकायतों के बावजूद एनओसी जारी कर दी गई
जांच में हुए खुलासे से सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शिकायतों के बावजूद पंचायत ने अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया। इस क्लब को व्यापार, उत्पाद शुल्क, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति मिली थी। क्लब के लिए पंचायत और सरकारी विभागों की ओर से अलग-अलग एनओसी जारी की गई थी। गोवा तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण भी जांच के दायरे में है।
दो शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई
तटीय विनियमन क्षेत्र के उल्लंघन और अवैध निर्माण के संबंध में दो लिखित शिकायतें प्राप्त हुईं। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मजिस्ट्रेट रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की परतें खोल दी हैं. 6 दिसंबर को अरपोरा गांव के एक नाइट क्लब में आग लग गई. इस आग में 25 लोगों की मौत हो गई.
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