
‘मैं जिंदू हूं’ की तख्ती लटकाए रिटायर फौजी
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला सिपाही आज अपने ही लोगों और सिस्टम की साजिश के आगे बेबस है। बिहार के समस्तीपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. यहां सेना के एक सेवानिवृत्त जवान को 11 साल पहले कागज पर ‘मृत’ घोषित कर दिया गया था। आज वह युवक गले में ‘मैं जिंदा हूं’ की तख्ती लटकाकर दफ्तरों में घूम रहा है।
2003 में सेना से सेवानिवृत्त हुए
आपने पंकज त्रिपाठी की फिल्म ‘कागज’ तो देखी ही होगी, लेकिन ये फिल्म हकीकत बन गई है समस्तीपुर के कल्याणपुर ब्लॉक के झखरा गांव में. मिलिए 63 वर्षीय सेवानिवृत्त फौजी अरुण कुमार ठाकुर से। 2003 में सेना से रिटायर हुए अरुण ठाकुर अभी भी जीवित हैं और सांस ले रहे हैं, लेकिन सरकारी फाइलें कहती हैं कि उनकी मृत्यु 11 साल पहले हो गई थी।
वर्ष 2014 में बनाया गया फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र
साजिश ऐसी कि रूह कांप जाए. आरोप है कि जमीन हड़पने के लिए भू-माफियाओं ने साल 2014 में ही अरुण ठाकुर का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया. हद तो तब हो गई जब उनके बेटों को शराब की लत लग गई और नशे की हालत में उनकी करीब 6 कट्ठा जमीन भी लिख ली गई. इस सिपाही को उसकी ‘मौत’ की खबर तब मिली जब लोग उसकी जमीन पर कब्जा करने पहुंचे.
कागजों में भू-माफिया मारे गये
इस मामले में जवान ने कहा, ‘मैं देश के लिए लड़ा, लेकिन आज मैं खुद को जिंदा साबित करने के लिए लड़ रहा हूं. भू-माफियाओं ने कागजों में मुझे मार डाला, ताकि मेरी जमीन हड़प सकें. जब वे अंचल कार्यालय गये तो उन्हें पंचायत सचिव के पास भेज दिया गया. अब मैंने डीएम साहब से गुहार लगाई है. अब यह रिटायर फौजी न्याय की आस में समस्तीपुर समाहरणालय पहुंचा है.
सैनिक का मृत्यु प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश
वहीं, अब इस मामले में समस्तीपुर डीएम रोशन कुशवाहा ने गंभीरता दिखाई है. डीएम रोशन कुशवाहा ने तुरंत मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं. सिपाही का मृत्यु प्रमाण पत्र भी रद्द करने का आदेश दिया गया है.
सुनील कुमार की रिपोर्ट
