
विमानन उद्योग में कई परंपराएं हैं जो न केवल अनुशासन बल्कि गहरे सम्मान को भी दर्शाती हैं। सबसे भव्य और भावनात्मक परंपराओं में से एक है ‘वॉटर कैनन सैल्यूट’। जब एक विमान रनवे पर उतरता है और दो दमकल गाड़ियां उसके दोनों ओर से पानी छिड़कती हैं और एक विशाल ‘मेहराब’ बनाती हैं, तो यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं होता है। यह सलामी हवाई अड्डों पर किसी विमान के आगमन पर, जब कोई विमान अपनी सेवा शुरू करता है या जब कोई विमान अपनी आखिरी उड़ान के बाद एयरलाइन से विदाई लेता है तो बजाया जाता है। यह आयोजन विमानन के महत्व का सम्मान करता है और इसकी सफलता का प्रतीक है।
जल तोप की सलामी कब दी जाती है?
जल तोप की सलामी आमतौर पर विशेष और ऐतिहासिक अवसरों पर दी जाती है। यह सम्मान किसी पायलट की अंतिम उड़ान के अवसर पर या किसी विमान के आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्त होने पर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, किसी हवाई अड्डे से किसी नई एयरलाइन या नए मार्ग की पहली उड़ान, या नए विमान प्रकार की पहली व्यावसायिक उड़ान का भी जल तोप की सलामी के साथ स्वागत किया जाता है।
कई बार यह सम्मान खेलों में देश का नाम रोशन करके लौटने वाली ओलंपिक टीमों के स्वागत के लिए भी दिया जाता है। वहीं, देश की सेवा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनके पार्थिव शरीर लाने वाली फ्लाइट को वॉटर कैनन सैल्यूट भी दिया जाता है। यह परंपरा विमानन जगत में सम्मान, गौरव और ऐतिहासिक पलों को यादगार बनाने का प्रतीक मानी जाती है।
विमानन में वाटर कैनन की शुरुआत कब हुई?
वॉटर कैनन सैल्यूट की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी। वाटर कैनन सैल्यूट की परंपरा विमानन में तब आई जब साल्ट लेक सिटी हवाई अड्डे के अग्निशामकों ने एक सेवानिवृत्त डेल्टा एयर लाइन्स पायलट को सम्मानित किया। यह पद्धति विशेष उड़ानों, एयरलाइनों या विमानों की पहली/अंतिम उड़ानों या विशेष लोगों को सम्मानित करने के तरीके के रूप में दुनिया भर में फैल गई।
