
प्रतीकात्मक फोटो.
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक महिला से ऑनलाइन धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें खुद को ‘जस्टिस चंद्रचूड़’ बताने वाले शख्स ने वर्चुअल सुनवाई के नाम पर उससे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए. आरोप है कि महिला को यह कहकर डराया गया कि उसे मनी लॉन्ड्रिंग के कथित मामले में फंसाया गया है और जमानत का वादा किया गया था. जब महिला ने खुद को निर्दोष बताया तो उससे अपनी संपत्ति और निवेश से जुड़े सभी दस्तावेज जमा करने को कहा गया.
आरोपी को सूरत से गिरफ्तार किया गया
जांच में पता चला है कि महिला ने अगस्त से अक्टूबर के बीच कुल 3.75 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए. ठगों ने दावा किया था कि ऑडिट के बाद रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन जब रकम वापस नहीं मिली तो महिला ने पुलिस से संपर्क किया। मामले की जांच मुंबई पुलिस के ज्वाइंट सीपी लखमी गौतम और डीसीपी साइबर पुलिस पुरूषोत्तम कराड के नेतृत्व में की गई, जिसके बाद पुलिस ने 46 साल के आरोपी जितेंद्र बियानी को सूरत से गिरफ्तार कर लिया.
एक और महिला से 1.1 करोड़ रुपये की ठगी!
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ठगी की रकम का इस्तेमाल अन्य डिजिटल गिरफ्तारी मामलों में भी किया. पुलिस ने कहा कि एक अन्य मामले में, एक 86 वर्षीय महिला को सात दिनों तक “डिजिटल गिरफ्तारी” के तहत रखा गया और उससे 1.1 करोड़ रुपये की उगाही की गई। ठगों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी बताकर फर्जी दस्तावेज और फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजे।
पुलिस ने लोगों से की अपील
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लोगों को डरा रहे हैं, जबकि भारतीय कानून में ऐसी प्रक्रिया का कोई प्रावधान नहीं है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और बिना सत्यापन के कोई भी निजी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने I4C डेटाबेस और ‘संदिग्ध खोज’ जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिसके जरिए संदिग्ध नंबर, ईमेल आईडी और यूपीआई पहचान की जांच की जा सकती है। किसी भी साइबर धोखाधड़ी के मामले में, तुरंत साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
