
रामायण से बीटीएस
आज के दौर में सिनेमा सिर्फ बड़े पर्दे और टीवी तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह काफी हद तक ओटीटी पर शिफ्ट हो चुका है। ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’, ‘द फैमिली मैन’, ‘पाताल लोक’ जैसी नई वेब सीरीज लोगों को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन 90 के दौर में एक टीवी शो ऐसा था जिसे देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे। कई लोग अपना सारा काम छोड़कर इस शो को देखते थे। कोविड काल में जब इसे दोबारा रिलीज किया गया तो एक बार फिर इसे देखने वालों के बीच होड़ लग गई. ये सीरियल की दुनिया में सबसे ज्यादा IMDb रेटिंग हासिल करने वाला टीवी शो है. इतना ही नहीं इसकी रेटिंग ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’, ‘द फैमिली मैन’ से बिल्कुल भी कम नहीं है। हम बात कर रहे हैं दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘रामायण’ की, जो सिर्फ एक टीवी शो नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन बन गया जिसने इसके निर्माता रामानंद सागर को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
रामायण शो से जुड़ी जानकारी
भले ही रामानंद सागर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी ‘रामायण’ का नाम लिया जाता है तो उनकी छवि अपने आप सामने आ जाती है। दूरदर्शन का लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ पहली बार 25 जनवरी 1987 को प्रसारित हुआ था और इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को प्रसारित हुआ था। यह शो हर रविवार सुबह 9 बजे दूरदर्शन पर प्रसारित होता था और कुल 78 एपिसोड में पूरा हुआ। रामानंद सागर द्वारा लिखित, निर्मित और निर्देशित यह धारावाहिक महर्षि वाल्मिकी की रामायण पर आधारित था। इसकी कहानी भगवान श्री राम के जीवन, उनके वनवास, माता सीता के अपहरण, रावण के साथ युद्ध और अंत में उनकी अयोध्या वापसी और उनके राज्याभिषेक पर केंद्रित है। इस धारावाहिक ने धर्म, सत्य, त्याग और मर्यादा जैसे आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाया। शो के कलाकारों ने किरदारों को अमर बना दिया, जिसमें अरुण गोविल ने श्रीराम की भूमिका निभाई, दीपिका चिखलिया ने सीता की भूमिका निभाई, सुनील लहरी ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई, दारा सिंह ने हनुमान की भूमिका निभाई और अरविंद त्रिवेदी ने रावण की भूमिका निभाई। ‘रामायण’ सिर्फ एक टीवी शो नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक सांस्कृतिक अध्याय बन गया।
जब राजीव गांधी ने रैली रद्द कर दी
‘रामायण’ के निर्माण से लेकर उसके प्रसारण तक का सफर अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं था। जब ये शो टीवी पर आया था उस वक्त हर घर में टीवी नहीं होता था. इसके बावजूद भी हर रविवार की सुबह लोग तय समय पर एक घर में इकट्ठा होते थे और भगवान श्री राम की लीलाओं का दर्शन करते थे. सड़कें सुनसान हो जाएंगी और माहौल उत्सव जैसा हो जाएगा. रामायण का प्रभाव केवल आम जनता तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका देश की राजनीति और प्रशासन पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। एक मशहूर किस्से के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को रामायण के कारण अपनी एक रैली रद्द करनी पड़ी थी. रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने बताया था कि उत्तर प्रदेश में राजीव गांधी की रैली रविवार सुबह 9 बजे तय थी. लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि उसी समय रामायण का प्रसारण हो रहा है तो उन्होंने यह समझकर रैली रद्द कर दी कि उस समय रैली में कोई शामिल नहीं होगा.
इस शो का असर रेलवे पर पड़ा
रामायण का क्रेज इतना जबरदस्त था कि इसका असर रेलवे तक में देखने को मिला. उत्तर प्रदेश के रामपुर रेलवे स्टेशन पर हर रविवार सुबह 9 बजे ट्रेनें देरी से चलती थीं। जब अधिकारियों ने इसका कारण खोजा तो यह बात सामने आई कि स्टेशन के वेटिंग रूम में रेलवे कर्मचारी और यात्री एक साथ टीवी पर रामायण देखते थे. दिलचस्प बात ये है कि वो टीवी भी रेलवे स्टाफ ने आपस में चंदा करके खरीदा था. इन सभी कहानियों से साफ है कि रामानंद सागर की ‘रामायण’ सिर्फ एक धारावाहिक नहीं थी, बल्कि आस्था, संस्कृति और एक पूरे युग की पहचान बन गई, जिसकी गूंज आज भी उतनी ही गहरी है। गौर करने वाली बात यह है कि ‘रामायण’ की IMDb रेटिंग 9 है।
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