
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट की तैयारियों से पहले पीएम मोदी ने मंगलवार को नीति आयोग में जाने-माने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन-आधारित सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने पर भी जोर दिया. बैठक में पीएम मोदी ने वैश्विक क्षमताओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकीकरण हासिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया. इस संवाद का विषय ‘आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत के लिए एजेंडा’ था।
विकसित भारत का लक्ष्य
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया और बजट निर्धारण में 2047 के संकल्प को केंद्र में रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश को वैश्विक श्रम शक्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाए रखना महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प अब सरकारी नीतियों से इतर आम लोगों की आकांक्षा बन गया है.
अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
चर्चा के दौरान अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उपायों पर रणनीतिक सुझाव साझा किए। उन्होंने यह भी कहा कि 2025 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुधार और आने वाले वर्ष में उनके एकीकरण से भारत को सबसे तेजी से बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने, आधार को मजबूत करने और नए अवसरों के द्वार खोलने में मदद मिलेगी। घरेलू बचत में वृद्धि, मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके संरचनात्मक परिवर्तन की गति को तेज करना चर्चा के केंद्र में रहा।
वित्त मंत्री समेत अन्य लोग मौजूद रहे
अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने वाले उपकरण के रूप में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को लगातार विस्तारित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम और आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इसके अलावा इस बैठक में कई जाने-माने अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ भी मौजूद थे.
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