
पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़ लिया.
बरेली: जिले के इज्जतनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो संदिग्ध कश्मीरी युवकों को हिरासत में लिया है. ये दोनों संदिग्ध कश्मीरी युवक इलाके में घूम-घूम कर भीख मांग रहे थे. हालांकि, स्थानीय लोगों को उनकी हरकतें संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी. जानकारी के मुताबिक, वे पास की एक मस्जिद में ठहरे हुए थे. पूछताछ में उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि वे दोनों गरीब हैं और भीख मांगकर गुजारा करते हैं. फिलहाल दोनों संदिग्ध युवकों के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है. इसके अलावा खुफिया एजेंसियां भी दोनों से पूछताछ में जुटी हैं.
संदिग्ध भीख मांग रहे थे
इज्जतनगर थाना प्रभारी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों युवक अहलादपुर चौकी क्षेत्र के धीमरी गांव की एक मस्जिद में ठहरे थे। उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा, ”वे दोनों सिर्फ यही कहते रहे कि वे गरीब हैं और भीख मांगकर गुजारा करते हैं.” पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियां भी उनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं. पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया दोनों संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों संदिग्धों की तस्वीरें और आधार कार्ड सत्यापन के लिए कश्मीर पुलिस को भेज दिए गए हैं और तत्काल जानकारी मांगी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनके दस्तावेज सही हैं या नहीं.
पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया
थाना प्रभारी ने बताया, ”शनिवार की सुबह दो कश्मीरी युवकों को धीमरी गांव में घर-घर जाकर भीख मांगते हुए देखा गया. गांव के लोगों को उनकी भाषा और बोलने के तरीके पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस के ‘एक्स’ अकाउंट पर शिकायत दर्ज कराई.” सिंह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद इज्जतनगर पुलिस गांव पहुंची. पहले तो पुलिस को देखकर दोनों युवक भीड़ में शामिल हो गए और नमाज पढ़ने लगे और आंखों से ओझल हो गए. गांव में दिखाई दिए और इस बार पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया.
दोनों से पूछताछ जारी है
थाना प्रभारी ने बताया कि पूछताछ में उन्होंने अपना नाम शौकत अली और सज्जाद बताया. दोनों कश्मीर के पुंछ जिले के रहने वाले हैं. पुलिस दोनों को थाने ले आई और सख्ती से पूछताछ के दौरान जब मामला गंभीर लगा तो इसकी सूचना खुफिया एजेंसियों को भी दी गई। सिंह ने कहा, “अब तक की पूछताछ में दोनों ने बताया है कि वे गांव की एक मस्जिद में ठहरे थे। वह कई साल पहले भी दिसंबर में बरेली आए थे। इस बार वह 10 दिसंबर को बरेली पहुंचे थे और तब से गांव में ही रह रहे थे।”
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