
एकनाथ शिंदे और ठाकरे ब्रदर्स
मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव अब सिर्फ स्थानीय पार्षदों को चुनने की प्रतियोगिता नहीं रह गई है, बल्कि यह ‘ब्रांड ठाकरे’ की विश्वसनीयता और अस्तित्व की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा बन गई है। दशकों बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना इस बात का संकेत है कि ‘मातोश्री’ की विरासत को बचाने के लिए ठाकरे परिवार ने अपने मतभेदों को किनारे रख दिया है.
वहीं, चुनाव आयोग के आंकड़ों ने इस लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है, जहां 87 सीटों पर ठाकरे बंधुओं और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच सीधी टक्कर है. इनमें से अधिकतर मराठी इलाके हैं.
कहां है किसके बीच टकराव?
मुंबई की 227 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है, लेकिन मुख्य फोकस उन मराठी बहुल सीटों पर है जहां शिंदे और ठाकरे आमने-सामने हैं.
- शिवसेना-यूबीटी बनाम शिंदे सेना- 69 सीटें
- एमएनएस बनाम शिंदे सेना- 18 सीटें
- शिवसेना-यूबीटी बनाम बीजेपी- 97 सीटें
आपको बता दें कि मुंबई में पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शिव सेना-यूबीटी का प्रदर्शन शिंदे सेना से काफी बेहतर रहा था. अब बीएमसी चुनाव में मुंबई के कुल 227 वार्डों में से 87 सीटों पर ‘मराठी बनाम मराठी’ का सीधा मुकाबला है. उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने से शिवसेना-यूबीटी की जमीनी ताकत दोगुनी हो गई है। उनका पूरा जोर ‘मराठी मानूस’ और ‘मराठी अस्मिता’ पर है. वहीं, बीजेपी और शिंदे सेना ने ठाकरे बंधुओं के क्षेत्रीय गौरव के मुद्दे की काट के लिए ‘हिंदुत्व’ की पिच तैयार कर ली है. शिंदे सेना का दावा है कि वे बालासाहेब ठाकरे के असली हिंदुत्व को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे उद्धव ने कांग्रेस में शामिल होकर छोड़ दिया है।
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