
अपने चाहने वालों के साथ बुजुर्ग शरीफ
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली कस्बे के एक परिवार में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब मृत समझे जाने वाले बुजुर्ग चाचा शरीफ 28 साल बाद अपने घर लौटे. आपको बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों के लिए चाचा शरीफ को अपने घर लौटना पड़ा, जिसके बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बुजुर्ग शरीफ 24 दिसंबर को मुजफ्फरनगर पहुंचे थे और अपने बिछड़े हुए परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद, वह मंगलवार, 30 दिसंबर को दिल्ली से ट्रेन पकड़कर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुए। उन्हें दिल्ली रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए उनके भतीजे और पोते भी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में उनसे मुलाकात की और खुशी के साथ उन्हें विदाई दी.
28 साल बाद परिवार से मिला बुजुर्ग
दरअसल, खतौली कस्बे में स्थित मोहल्ला बालक राम निवासी बुजुर्ग शरीफ की पहली पत्नी की 1997 में मौत हो गई थी। इसके चलते दूसरी शादी के बाद शरीफ अपनी पत्नी को लेकर पश्चिम बंगाल चला गया। कुछ समय तक परिवार से संपर्क रहा लेकिन धीरे-धीरे वह संपर्क टूट गया। इसके बाद परिवार के लोगों ने शरीफ के बताए गए पश्चिम बंगाल के पते पर जाकर उसे ढूंढने की कोशिश की लेकिन जब कुछ पता नहीं चला तो परिवार के लोग शरीफ को मृत मानकर संतुष्ट हो गए लेकिन शुरू हुई एसआईआर में जब बुजुर्ग शरीफ को दस्तावेजों की जरूरत पड़ी तो वह 28 साल बाद 2 दिन पहले अचानक अपने घर लौट आए, जिसके बाद उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसी दौरान बुजुर्ग शरीफ को यह भी पता चला कि इन 28 सालों के दौरान उनके परिवार के कई सदस्यों का निधन हो चुका है.
परिजनों ने तलाश की लेकिन चाचा शरीफ नहीं मिले।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बुजुर्ग शरीफ के भतीजे मोहम्मद अकलीम कहते हैं कि मोहम्मद अकलीम वालिद मोहम्मद इदरीस मेरे चाचा हैं. शरीफ हमारे पिता से छोटे थे, हमारी चाची का 1997 में निधन हो गया, इसलिए उन्होंने दूसरी शादी कर ली। उस समय लैंड लाइन फोन हुआ करते थे. मोबाइल नहीं थे. 1997 में मैंने उन्हें अपने दो नंबर और अपने चाचा के तीन नंबर दिये थे. लेकिन उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला. उसने हमें बताया कि खड़कपुर के अंदर एक मोती दर्जी है, पता करो। मैं वहां रहता हूं। मैं भी खड़कपुर गया और मोती ट्रेलर के बारे में पता किया तो पता चला कि मोती टेलर वहां नहीं है. फिर मैं 2011 के आसपास आसनसोल गया तो वहां जमात के कई लोगों से भी हमने पता किया. लेकिन पता नहीं चल सका.
रिपोर्ट-योगेश त्यागी,मुज़फ्फरनगर
