पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। देशभर में सभी खुदरा ईंधन दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है. सरकार का कहना है कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है. मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुनियोजित और बेहद स्पष्ट तरीके से फैलाई जा रही गलत सूचना का शिकार न हों, जिसका उद्देश्य अनावश्यक दहशत पैदा करना है।
पेट्रोल पंप बिना किसी रुकावट के खुले हैं
मंत्रालय ने कहा कि देशभर में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप बिना किसी रुकावट के खुले हैं और कहीं भी राशनिंग लागू नहीं की गई है. कुछ जगहों पर हड़बड़ाहट में ईंधन खरीदने की घटनाएं हुईं, लेकिन ये सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक खबरों का असर था. इसके बावजूद, तेल कंपनियों ने आपूर्ति बनाए रखी और डिपो का संचालन जारी रहा। साथ ही पेट्रोल पंपों को दिए जाने वाले क्रेडिट को 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन कर दिया गया है, ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न हो.
कच्चे तेल की आपूर्ति: पूरी तरह सुरक्षित
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों के बावजूद भारत को 41 से अधिक देशों से लगातार कच्चा तेल मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार, विशेषकर पश्चिमी देशों से अतिरिक्त आपूर्ति, किसी भी संभावित कमी की भरपाई से कहीं अधिक है। सभी रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों के लिए आपूर्ति पहले से ही सुनिश्चित है।
वास्तविक स्टॉक लगभग 60 दिनों के लिए उपलब्ध है
देश में सिर्फ 6 दिन का स्टॉक होने का दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। भारत की कुल भंडारण क्षमता 74 दिनों की है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक लगभग 60 दिनों का है। मध्य पूर्व में जारी संकट के बावजूद देश के पास लगभग दो महीने की सुरक्षित ईंधन आपूर्ति है, इसलिए किसी भी कमी की आशंका निराधार है।
एलपीजी: उत्पादन बढ़ा, आयात घटा
एलपीजी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य है. सरकार के कदमों के बाद, घरेलू उत्पादन में 40% की वृद्धि हुई है और अब प्रतिदिन 50 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि कुल आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी है। इससे आयात की आवश्यकता घटकर 30 टीएमटी रह गई है.
इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी की खेप पहले ही तय हो चुकी है। देश के 22 आयात टर्मिनलों से सप्लाई लगातार जारी है. तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर बांट रही हैं और मांग अब सामान्य स्तर पर आ गई है.
पीएनजी बूस्ट: दीर्घकालिक योजना
पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को सस्ते, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। भारत की गैस उत्पादन क्षमता 92 MMSCMD है, जबकि कुल मांग 191 MMSCMD है। पिछले कुछ वर्षों में शहरी गैस वितरण नेटवर्क और घरेलू कनेक्शन का तेजी से विस्तार हुआ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएनजी को बढ़ावा देना किसी संकट का संकेत नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।
सरकार की सख्त चेतावनी
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक खबरों और वीडियो पर गंभीर चिंता जताई है. कई पोस्ट में दूसरे देशों की तस्वीरों और खबरों को भारत से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिससे अनावश्यक भय का माहौल पैदा हो रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि गलत जानकारी फैलाना कानूनी अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और अफवाहों पर ध्यान न दें.
