
पौष पूर्णिमा 2026
पौष पूर्णिमा 2026: पौष पूर्णिमा के दिन कुछ काम करना आपके लिए बेहद शुभ साबित हो सकता है। साल 2026 में पौष पूर्णिमा 2 और 3 जनवरी को होगी। पौष पूर्णिमा 2 जनवरी की शाम से शुरू होगी इसलिए पूर्णिमा का व्रत 2 जनवरी को रखा जाएगा. वहीं 3 जनवरी को स्नान और दान के लिए शुभ माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पौष पूर्णिमा के दिन कौन से काम करने से आपको लाभ मिलेगा और आपके जीवन में सुख-शांति आएगी।
पौष पूर्णिमा पर स्नान और दान करें
पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन किया गया दान और स्नान न सिर्फ आपकी आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि पापों से भी मुक्ति दिलाता है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
ध्यान करें और गुरुओं से ज्ञान प्राप्त करें
इस दिन ध्यान करने से आपको अलौकिक अनुभव हो सकते हैं। इस दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में होता है इसलिए ध्यान की गहराई बढ़ती है और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है। इसके साथ ही आध्यात्मिक गुरुओं के उपदेश सुनने और धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करने से भी आपको ज्ञान प्राप्त होता है।
सूर्य और चंद्रमा की पूजा करें
पौष पूर्णिमा की सुबह आपको सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए, जबकि शाम को आप चंद्रमा की पूजा कर सकते हैं। इस दिन सूर्य और चंद्रमा की पूजा करने से पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है और कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है। आत्मा और मन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सूर्य और चंद्रमा की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।
पितरों के लिए तर्पण करें
पूर्णिमा के दिन अपने पितरों का ध्यान करना चाहिए और उन्हें तर्पण भी देना चाहिए। ऐसा करने से आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और साथ ही पितरों के आशीर्वाद से आपके बिगड़े काम भी बनने लगते हैं। साल की पहली पूर्णिमा पर पितृ तर्पण करने से आपको पूरे साल सुख, शांति और आर्थिक लाभ मिल सकता है।
देवी लक्ष्मी की पूजा
पूर्णिमा की शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। ऐसे में अगर आप मां लक्ष्मी की पूजा करेंगे तो घर में सुख-शांति बनी रहेगी। इसके अलावा धन से जुड़े मामलों में भी आपको शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सच्चाई का प्रमाण नहीं देता है।)
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