
आईएनएसवी कौंडिन्य गुजरात के पोरबंदर से ओमान तक जाएगी
आईएनएसवी कौंडिन्य: अजंता की गुफाओं में मिले चित्रों पर आधारित 2000 साल पुरानी तकनीक से बना जहाज INSV कौंडिन्य आज पोरबंदर से ओमान के लिए रवाना होगा. लकड़ी के तख्तों से बने इस जहाज को नारियल की रस्सियों से सिला गया है, इसमें कहीं भी कीलों का इस्तेमाल नहीं किया गया है. जहाज में न तो इंजन है और न ही जीपीएस. इसमें चौकोर कॉटन सेल और पैडल हैं।
जहाज पूरी तरह हवा से चलेगा
लकड़ी के तख्तों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए किसी कील का प्रयोग नहीं किया गया है। यह जहाज पूरी तरह से हवा से संचालित होगा, इसमें कपड़े की पाल होगी। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग कृष्णा स्वामीनाथन हरी झंडी दिखाएंगे।
2 हजार साल पुरानी तकनीक
यह जहाज 2 हजार साल पुरानी तकनीक से बना है। पोरबंदर से ओमान तक की समुद्री दूरी 1400 किलोमीटर (750 समुद्री मील) है। यह यात्रा 15 दिनों की होगी और इसमें 13 नाविक और 3 अधिकारी मौजूद रहेंगे.
नाविक ‘कौंडिन्य’ के नाम पर रखा गया नाम
जहाज की लंबाई: 65 फीट. चौड़ाई 22 फीट, ऊंचाई 13 फीट और वजन 50 टन बताया जा रहा है। इस जहाज का नाम महान नाविक ‘कौंडिन्य’ के नाम पर रखा गया है, जो भारत के हजारों साल पुराने समुद्री व्यापार इतिहास को दर्शाता है।
इस परियोजना को 2023 में मंजूरी दी गई थी
ऐसे जहाज को चलाने का व्यावहारिक अनुभव आज किसी के पास नहीं है। इसी वजह से इसके क्रू मेंबर्स को पिछले कई महीनों से खास ट्रेनिंग दी जा रही है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को साल 2023 में मंजूरी दी थी, जिसका मकसद भारत के पुराने जहाज निर्माण कौशल को दुनिया के सामने लाना है.
7 महीने पहले नेवी ज्वाइन की थी
गोवा की एक कंपनी ने इस जहाज को लगभग 2000 साल पुराने टैंक की शैली में बनाया है। INSV कौंडिन्य को 7 महीने पहले नौसेना में शामिल किया गया था। आईएनएसवी कौंडिन्य एक विशेष प्रकार का नौकायन पोत है, जिसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।
पुरानी भारतीय नौसेना का इतिहास
जो पुरानी भारतीय नौसेना के इतिहास और नाविक कला पर आधारित है। इस जहाज का डिज़ाइन 5वीं शताब्दी ईस्वी के व्यापारिक जहाज से लिया गया है। जिसे अजंता गुखाय की दीवारों पर बने चित्रों में दर्शाया गया है। इसका नाम एक पुराने भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा की और फ़नान साम्राज्य की स्थापना की। पूरा जहाज पुरानी सिलाई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। जिसमें लकड़ी की पट्टियों को लकड़ी के तख्तों से जोड़कर, गांठ लगाकर प्राकृतिक गोंद से सील कर दिया जाता है।
जानिए किस कंपनी ने बनाया जहाज
इसे मेसर्स होदी इनोवेशन (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। लिमिटेड ने बनाया है. इसके डिजाइन और तकनीकी सत्यापन में नौसेना ने अहम भूमिका निभाई है. यह परियोजना संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय नौसेना और होदी इनोवेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के हिस्से के रूप में शुरू की गई थी।
डिज़ाइन और तकनीकी विशिष्टताएँ
- लंबाई: ~19.6 मीटर (64.3 फीट)
- बीम: ~6.5 मी
- ड्राफ्ट: ~3.33 मी
- प्रणोदन: हल्की हवाओं में चौकोर पाल और स्टीयरिंग चप्पू।
- कोई ईंधन या मशीनरी नहीं – पारंपरिक पाल और जिब प्रणाली।
- चालक दल: लगभग 15-16 लोगों का दल।
सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व
आईएनएसवी कौंडिन्य सिर्फ एक जहाज नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और समुद्री व्यापार का एक प्रमाण है। यह गुजरात से ओमान तक पुराने व्यापार मार्ग को वापस लाएगा, जो इसकी स्थायी विरासत का एक ऐतिहासिक प्रमाण है।
